पौधे अपना भोजन कब बनाते हैं? | paudhe apna bhojan kab banate hain

पौधे अपना भोजन कब बनाते हैं?

पौधे अपना भोजन दिन में बनाते हैं क्यूंकि उनको भोजन बनाने के लिए सूर्य की किरणों की आवश्यकता होती है। प्रकाश-संश्लेषण अर्थात 'प्रकाश' की मौजूदगी में होने वाली भोजन निर्माण की क्रिया केवल हरे पौधों में ही होती है। ये पौधे अपने हरे पदार्थ (क्लोरोफिल) की मदद से सूर्य के प्रकाश में वायु से ली हुई कार्बन डॉइआक्साइड तथा मिट्टी से सोखे हुए जल को जोड़कर ग्लूकोज नामक शर्करा का निर्माण करते हैं। केवल सूर्य का प्रकाश (धूप) से ही नहीं, बल्कि किसी अन्य स्त्रोत से भी यह क्रिया हो सकती है। मगर चूंकि खुली प्रकृति में, खेतों, जंगलों में जहां सूर्य का ही प्रकाश उपलब्ध है, वहां प्रकाश-संश्लेषण में प्रकाश का अर्थ सूर्य के प्रकाश से ही है।
अब आप सोच रहे होंगे कि क्या चंद्रमा के प्रकाश में प्रकाश-संश्लेषण होगा? नहीं वह अत्यंत धीमा होता है, और उसमें आवश्यक ऊर्जा उपलब्ध नहीं होती। दो मुख्य उत्पाद-ग्लूकोज (भोजन) तथा आक्सीजन (जीवनदायनी गैस) के कारण यदि प्रकाश-संश्लेषण को सही अर्थो में 'आम के आम और गुठलियों के दाम' कहें तो अनुचित नहीं होगा। एक ओर स्वयं पौधे के लिए और पौध ' के द्वारा अन्य जीव जंतुओं के लिए भोजन प्राप्त होता है और दूसरे वह आक्सीजन जो समस्त जीवों के लिए अनिवार्य है, प्राप्त होती है।

भोजन पत्तियों में बनता है, परंतु पौधे के अन्य भागों में कैसे पहुंचता है?
आपने देखा था कि पत्तियों में शिराएं होती हैं और उनकी बारीक-बारीक शाखाएं पत्ती की लगभग प्रत्येक कोशिका तक पहुंची होती है। ये शिराएं, धरती से सोखे गए और तने द्वारा ऊपर लाए गए जल को कोशिकाओं में लाती है तथा पत्ती की कोशिकाओं में बना ग्लूकोज इन्हीं शिराओं के दूसरे भागों द्वारा तने में पहुंचाया जाता है, जहां से वह समस्त पौधे में ऊपर-नीचे फैल जाता है।

जैसा आप जानते हैं कि समस्त जीवधारियों को जीवित रहने, वृद्धि एवं जनन करने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है; इसलिए प्रत्येक जीव को वृद्धि की आवश्यकताओं के लिए भोजन ग्रहण कर उसके खाद्य अवयवों (constituents) का उपयोग करते हैं। क्रमिक प्रक्रियाओं द्वारा पौधा खाद्य संश्लेषण तथा उसका सरल पदार्थों में विघटन करता है और अंततः विभिन्न जीवन कार्यों में उन पदार्थों का उपयोग करता है। अतः पादप पोषण वह प्रक्रिया है जिसमें खाद्य संश्लेषण, उसका विघटन तथा शरीर की विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए उनका उपयोग होता है।
भोजन के रासायनिक पदार्थों को पोषक तत्त्व (nutrients) कहते हैं, जैसे CO2 जल, खनिज लवण, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, इत्यादि। हरे पौधे जल एवं CO2 जैसे सरल तत्त्वों से प्रकाशसंश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बना सकते हैं अतः उन्हें स्वपोषी (autotrophs - auto-self - trophs-feeding) कहते हैं। परंतु अहरित पौधे एवं कुछ अन्य जीव जो स्वयं भोजन नहीं बना सकते तथा हरे पादपों से पोषण प्राप्त करते हैं उन्हें विषमपोषी अथवा परपोषी (heterotrohs; hetero - different) कहते हैं।

पौधे अपना भोजन कैसे बनाते है?

हम जीवों को भोजन और हवा देने वाले पौधों को भी जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है और ये अपना भोजन खुद बनाते हैं। मतलब यह है कि पौधे भी भोजन करते हैं और इसे विधि प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) कहा जाता है।
सीधी भाषा में कहें तो पेड़ पौधों द्वारा प्रकाश की उपस्थिति में भोजन बनाने की विधि को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं, यह पेड़ पौधों में होता है, जो कि इनका मुख्य घटक पत्तियों मे उपस्थित पर्णहरित है और पादप यानी वनस्पति विज्ञान की भाषा में सजीव कोशिकाओं के द्वारा प्रकाशीय ऊर्जा Light Energy को रासायनिक ऊर्जा Chemical Energy में परिवर्तित करने की क्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहा जाता है।
प्रकाश संश्लेषण में पौधे अपने हरे रंग वाले अंगों जैसे पत्ती द्वारा सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में वायु से कार्बनडाइऑक्साइड तथा भूमि से जल लेकर जटिल कार्बनिक खाद्य पदार्थों जैसे कार्बोहाइड्रेट्स का निर्माण करते हैं, साथ ही वे ऑक्सीजन गैस बाहर निकालते हैं।

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